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कागज की नाव
Overview
लल्लू उर्फ लालचन्द हजारे ने जब दो कड़क मवालियों की शागिर्दी पकड़ी थी तो उसे अपना भविष्य बहुत स्वर्णिम और उज्जवल लगता था । वो अनायास ही अमीर बनने, दौलत के पहाड़ पर बैठने के सपने देखने लगा था । काश कि वो जानता कि अपराध कागज की नाव की तरह होता है जो बहुत देर तक, बहुत दूर तक नहीं चल सकती ।
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Book details & editions
| ISBN | 17255162 |
| Publisher | |
| Publication date | June 1987 |
| Language | Hindi |
| Pages | 315 pages |
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