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चांद का मुँह टेढ़ा है
Overview
(चाँद का मुहँ टेढ़ा है)
नगर के बीचों-बीच
आधी रात--
अंधेरे की काली स्याह
शिलाओं से बनी हुई
भीतों और अहातों के,
काँच-टुकड़े जमे हुए
ऊँचे-ऊँचे कन्धों पर
चांदनी की फैली हुई
सँवलायी झालरें।
कारखाना--
अहाते के उस पार
धूम्र मुख चिमनियों के ऊँचे-ऊँचे
उद्गार--चिह्नाकार--मीनार
मीनारों के बीचों-बीच
चांद का है टेढ़ा मुँह!![14]
नगर के बीचों-बीच
आधी रात--
अंधेरे की काली स्याह
शिलाओं से बनी हुई
भीतों और अहातों के,
काँच-टुकड़े जमे हुए
ऊँचे-ऊँचे कन्धों पर
चांदनी की फैली हुई
सँवलायी झालरें।
कारखाना--
अहाते के उस पार
धूम्र मुख चिमनियों के ऊँचे-ऊँचे
उद्गार--चिह्नाकार--मीनार
मीनारों के बीचों-बीच
चांद का है टेढ़ा मुँह!![14]
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Book details & editions
| ISBN | 23361320 |
| Publisher | bhartiya gyanpeeth |
| Publication date | November 2026 |
| Language | Hindi |
| Pages | 296 pages |
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